BCom3rd Year Corporate Accounting Issue Forfeiture Share Study Material notes in hindi

BCom3rd Year Corporate Accounting Issue Forfeiture Share Study Material notes in hindi

BCom3rd Year Corporate Accounting Issue Forfeiture Share Study Material notes in hindi : Meaning and Definition of Company Companies with Charitable Objects classes of Shares  Journal Entries  Issue of Shares  Calles In Arrears Under Subscription of Shares Calculation Table :

BCom3rd Year Corporate Accounting Issue Forfeiture Share Study Material notes in hindi
BCom3rd Year Corporate Accounting Issue Forfeiture Share Study Material notes in hindi

BCom 2nd Year Cost Accounting Study Material Notes in Hindi

अंशों का निर्गमन, हरण व पुनर्निर्गमन

(Issue, Forfeiture and Reissue of Shares)

कम्पनी अधिनियम 2013 (Companies Act 2013)

कम्पना अधिनियम 2013 को भारत के राष्ट्रपति की मंजूरी 20 अगस्त 2013 को प्राप्त हुई और यह 1 अप्रैल 2014 स प्रभावी हुआ है। इस अधिनियम में कुल 470 धारायें हैं और सात अनुसूचियाँ हैं।

कम्पनी का आशय और परिभाषा (Meaning and Definition of Company)

कम्पनी व्यक्तियों का एक स्वैच्छिक संघ होता है जिसकी रचना किसी राजनियम के अन्तर्गत लाभ के लिये व्यवसाय चलाने का लिये की जाती है।

हैने के शब्दों में, “कम्पनी राजनियम द्वारा निर्मित एक कृत्रिम व्यक्ति है जिसका एक पृथक अस्तित्व होता है, जिसका अविच्छिन्न उत्तराधिकार चलता रहता है और जिसकी एक सार्वमुद्रा होती है।” ___

भारतीय कम्पनी अधिनियम 2013 की धारा 2 (20) के अनुसार, “कम्पनी से आशय इस अधिनियम के अन्तर्गत समामेलित अथवा किसी पूर्व कम्पनी अधिनियम के अन्तर्गत समामेलित एक कम्पनी से है। किन्तु यह परिभाषा एक कम्पनी की सभी अपिरिहार्य विशेषताओं को स्पष्ट नहीं कर पाती है।

इस सम्बन्ध में अमरीका के मुख्य न्यायाधीश श्री मार्शल की परिभाषा एक कम्पनी की विशेषताओं को अधिक प्रकाशवान करती है। उनके शब्दों में, “एक कम्पनी कृत्रिम, अदृश्य, अमूर्त व्यक्ति है और केवल कानून की आँखों में विद्यमान होती है; इसमें केवल वही गुण पाये जाते हैं जो कि इसके सृजन का चार्टर इसे प्रदान करता है, चाहे स्पष्ट रूप से और चाहे इसके स्वयं के अस्तित्व के लिये ही प्रासंगिक हो। इसका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं होता है किन्तु केवल कानून के ध्यान में विद्यमान होती है।

इस प्रकार एक कम्पनी की प्रमुख विशेषतायें निम्नलिखित हैं :

(1) स्वैच्छिक संघ (Voluntary Association) : कम्पनी सामान्यतया लाभ के लिये निर्मित व्यक्तियों का एक स्वैच्छिक संघ । होती है।

(2) राजनिमय द्वारा निर्मित (Created by Law): कम्पनी का जन्म किसी राजनियम के अन्तर्गत होता है।

(3) कत्रिम व्यक्ति (Artificial Person) : कम्पनी अधिनियम के अन्तर्गत कम्पनी को एक कृत्रिम व्यक्तित्व प्राप्त होता है तथा यह अपने संचालकों के माध्यम से कार्य करती है।

(4) पृथक अस्तित्व (Separate Entity) : कम्पनी का अपने मालिकों (अंशधारियों) से पृथक अस्तित्व होता है और वह अपने नाम से वाद प्रस्तुत कर सकती है तथा दूसरे लोग उस पर वाद प्रस्तुत कर सकते हैं।

(5) अविच्छिन्न उत्तराधिकार (Perpetual Succession) : कम्पनी का जीवन उसके सदस्यों के जीवन से प्रभावित नहीं होता है। किसी सदस्य (या सदस्यों) की मृत्यु पर मृतक का उत्तराधिकारी कम्पनी का सदस्य बन जाता है और कम्पनी बिना किसी रुकावट के चलती रहती है।

(6) सर्वमान्य सार्वमुद्रा (Common Seal) : कम्पनी की अपनी एक सार्वमुद्रा या मोहर होती है जिसके लगाये जाने पर ही कोई प्रलेख कम्पनी का माना जाता है।

 (7) सीमित दायित्व (Limited Liability) : सामान्यतया कम्पनी के सदस्यों का दायित्व उनके धारणों पर अदत्त राशि तक ही सीमित होता है।

(8) अंशों की हस्तान्तरणीयता (Transferability of Shares) – एक कम्पनी के अंशधारियों को अपने अंशों के हस्तान्तरण का अधिकार होता है किन्तु एक निजी कम्पनी की दशा में सदस्यों के अपने अंशों के हस्तान्तरण के अधिकारों पर कुछ प्रतिबन्ध लगे होते हैं।

Corporate Accounting Issue Forfeiture

कम्पनियों के प्रकार (Kinds of Companies)

कम्पनी अधिनियम 2013 इसके अन्तर्गत बनने और पंजीकृत होने वाली अनेक प्रकार की कम्पनियों की व्यवस्था करता है। कुछ महत्वपूर्ण प्रकार की कम्पनियाँ नीचे दी गयी हैं।

पंजीकत कम्पनियाँ (Registered Companies)

कम्पनी अधिनियम 2013 के अधीन बनी और पंजीकत कम्पनियाँ तथा विद्यमान कम्पनियाँ पंजीकृत कम्पनियाँ कहलाती हैं। इस प्रकार की कम्पनियाँ निम्न प्रकार की होती हैं :

(अ) गारंटी द्वारा सीमित कम्पनियाँ (Companies Limited by Guarantee) :

कम्पनी अधिनियम 2013 की धारा 2 (21) के अनुसार गारंटी द्वारा सीमित दायित्व वाली कम्पनी का आशय एक ऐसी कम्पनी से है जिसके सदस्यों का दायित्व पार्षद सीमानियम द्वारा उस राशि तक सीमित होता है जिसे वे इसके समापन के समय कम्पनी की सम्पत्तियों में अंशदान के लिये गांरटी देते हैं।

(ब) अंशों द्वारा सीमित कम्पनियाँ (Companies Limited by Shares) : कम्पनी अधिनियम 2013 की धारा 2 (22) के अनुसार अंशी द्वारा सीमित दायित्व वाली कम्पनी का आशय एक ऐसी कम्पनी से है जिसके सदस्यों का दायित्व पार्षद सीमानियम द्वारा उनके द्वारा धारित अंशों की चुकता न की गयी राशि तक ही सीमित होता है।

(स) असीमित दायित्व वाली कम्पनियाँ (Unlimited Companies) : कम्पनी अधिनियम 2013 की धारा 2 (92) के अनुसार असीमित दायित्व वाली कम्पनी का आशय एक ऐसी कम्पनी से है जिसके सदस्यों के दायित्व की कोई सीमा नहीं होती है। किन्तु इनका दायित्व इनकी सदस्यता के दौरान लिये गये ऋणों तक ही सीमित होता है।

एक व्यक्ति कम्पनी (One Person Company)

कम्पनी अधिनियम 2013 की धारा 2 (62) के अनुसार एक व्यक्ति कम्पनी का आशय एक ऐसी कम्पनी से है जिसमें केवल एक व्यक्ति ही सदस्य होता है। कम्पनी अधिनियम 2013 की धारा 3 (1) (c) के अनुसार एक व्यक्ति द्वारा पार्षद सीमानियम में अपना हस्ताक्षरित नाम देकर और पंजीकरण के सम्बन्ध में इस अधिनियम की आवश्यकताओं का परिपालन करके किसी भी वैध उद्देश्य के लिये एक कम्पनी की रचना की जा सकती है।

एक व्यक्ति कम्पनी के सीमानियम में एक अन्य व्यक्ति का नाम, नियत फार्म में उसकी पूर्व लिखित सहमति के साथ, भी दिया जायेगा जो कि हस्ताक्षरकर्ता की मृत्यु अथवा प्रसंविदा के लिये उसकी अक्षमता की स्थिति में कम्पनी का सदस्य बन जायेगा और एक ‘क्ति कम्पनी के समामेलन के समय इसके पार्षद सीमानियम और अन्तर्नियमों के साथ ही ऐसे व्यक्ति की लिखित सहमति कम्पनी मा ों के रजिस्ट्रार के पास फाइल की जायेगी।

निजी कम्पनी (Private Company) कम्पनी अधिनियम 2013 की धारा 2 (68) के अनुसार एक निजी कम्पनी वह कम्पनी है जिसकी न्यूनतम प्रदत्त अंश पूँजी ₹ 1 लाख अथवा नियत की गई ऐसी ऊँची प्रदत्त अंश पूँजी हो और जो अपने अन्तर्नियमों द्वारा :

1. अपने अंशों के हस्तान्तरण के अधिकार पर रोक लगाती है;

2. एक व्यक्ति कम्पनी के सिवाय इसमें सदस्यों की संख्या 200 तक सीमित करती है। और

3. कम्पनी की प्रतिभूतियों के अभिदान के लिये जनता को आमन्त्रित करने पर प्रतिबन्ध लगाती है।

धारा 3(1)(b) के अनुसार एक निजी कम्पनी में न्यूनतम 2 सदस्य होने चाहिये और निजी कम्पनी का नाम “प्राइवेट लिमिटेड”। शब्दों के साथ समाप्त होना चाहिये।

सार्वजनिक कम्पनी (Public Company)

कम्पनी अधिनियम 2013 की धारा 2(71) के अनुसार सार्वजनिक कम्पनी का आशय एक ऐसी कम्पनी से है :

अंशों का निर्गमन, हरण एवं पुनर्निर्गमन

(अ) जोकि एक निजी कम्पनी नहीं है:

(ब) जिसका न्यूनतम प्रदत्त अंश पूँजी ₹5 लाख अथवा उससे उतनी ऊँची प्रदत्त अंश पँजी है जैसा इसके लिये नियत किया गया है।

एक सावजनिक कम्पनी की सहायक कम्पनी भी इस अधिनियम के अन्तर्गत सार्वजनिक कम्पनी ही मानी जायेगी चाहे यह सहायक कम्पनी अपने अन्तर्नियमों के अन्तर्गत एक निजी कम्पनी क्यों न चल रही हो।।

कम्पनी अधिनियम 2013 की धारा 3(1)(a) के अनुसार एक सार्वजनिक कम्पनी के अन्तगत न्यूनतम सार्वजनिक कम्पनी के नाम का अन्त “लिमिटेड” शब्द से होना चाहिये। ऐसी कम्पनी के अंश स्वतंत्रतापूर्वक हस्तान्तरणीय होते है।

Corporate Accounting Issue Forfeiture

सरकारी कम्पनी (Government Company)

कम्पनि आधिनियम 2013 का धारा 2 (45) के अनसार सरकारी कम्पनी का आशय एक ऐसी कम्पनी से है जिसका प्रदत्त। अंशपूँजी का न्यूनतम 51 प्रतिशत केन्द्र सरकार अथवा किसी भी राज्य सरकार अथवा सरकारों अथवा अंशतः केन्द्रीय सरकार और अंशतः किसी एक या अधिक राज्य सरकारों के पास हो। इसमें एक ऐसी भी कम्पनी सम्मिलित है जो कि एक सरकारी कम्पनी को। सहायक है।

विदेशी कम्पनी (Foreign Company)

कम्पनी अधिनियम 2013 की धारा 2(42) के अनुसार विदेशी कम्पनी का आशय भारत के बाहर समामेलित किसी भी कम्पनी अथवा निगमीय मण्डल से है :

(अ) जिसका स्वयं का अथवा एक अभिकर्ता के माध्यम से, भौतिक रूप से अथवा इलैक्ट्रोनिक मोड से भारत में एक व्यवसाय स्थल है; और

(ब) जोकि भारत में किसी भी अन्य प्रकार से किसी भी प्रकार का व्यवसाय चलाती है।

लघु कम्पनी (Small Company)

कम्पनी अधिनियम 2013 की धारा 2 (85) के अनुसार लघु कम्पनी का आशय एक सार्वजनिक कम्पनी के अतिरिक्त किसी एक ऐसी कम्पनी से है :

(अ) जिसकी प्रदत्त अंश पूँजी ₹ 50 लाख अथवा निर्धारित ऐसी ऊँची राशि जो कि ₹ 5 करोड़ से अधिक नहीं होगी, से अधिक न हो; अथवा

(ब) विगत लाभ-हानि खाते के अनुसार जिसकी बिक्री ₹ 2 करोड़ अथवा निर्धारित ऐसी ऊँची राशि जोकि ₹ 20 करोड़ से अधिक नहीं होगी, से अधिक नहीं है।

इस धारा की व्यवस्थाएँ किसी सूत्रधारी कम्पनी, सहायक कम्पनी, धारा 8 के अन्तर्गत पंजीकत कम्पनी अथवा किसी भी विशिष्ट अधिनियम द्वारा प्रशासित कम्पनी पर लागू नहीं होंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *