BCom 2nd Year Deduction Collection Income Tax Source Study Material notes in Hindi

BCom 2nd Year Deduction Collection Income Tax Source Study Material notes in Hindi

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BCom 2nd year cost Accounting Unit output costing method study material notes in Hindi

उदगम स्थान (स्रोत) पर आयकर की कटौती एवं संग्रह

(DEDUCTION AND COLLECTION OF INCOME TAX AT SOURCE

उद्गम स्थान (स्रोत) पर कर की कटौती का अर्थ

(Meaning of Deduction of Tax at Source)

कोई आय सर्वप्रथम जहाँ से प्राप्त होती है, वही उस आय का उद्गम स्थान कहलाता है एवं आय का भुगतान करने वाले व्यक्ति द्वारा भुगतान करते समय आय पर निर्धारित दर से कर की कटौती करने को ‘उद्गम स्थान पर कर की कटौती’ कहते हैं। आय का भुगतान करने वाला व्यक्ति निर्धारित दर से कर की राशि काट कर शेष राशि आय प्राप्त करने वाले को भुगतान कर देता। है एवं काटी गई आय-कर की राशि को करदाता के नाम से सरकारी कोष में जमा कर देता है तथा करदाता को काटी हुई राशि का प्रमाण-पत्र दे देता है, जिसे ‘काटे गये कर का प्रमाण-पत्र’ (Certificate of Tax Deducted At Source) (संक्षेप में, TDS Certificate) कहते हैं। ‘उद्गम स्थान पर कर की कटौती के प्रावधान से आय-कर की प्रभावी वसूली हो जाती है।

उद्गम स्थान पर काटा गया कर” करदाता की आय मानी जाती है और उसे कुल आय में शामिल किया जाता है। उद्गम स्थान पर काटी गई राशि को नियमित कर निर्धारण पर देय राशि में समायोजित किया जाता है। यदि देय कर की राशि कम है, तो आधिक्य राशि विभाग द्वारा करदाता को वापिस लौटा दी जाती है।

विशेषउद्गम स्थान पर कर की कटौती के कारण ही सम्बन्धित आय की प्राप्त राशि को ‘सकल’ (Gross up) किया जाता है। ‘सकल’ करने का सीधा सा तरीका यह है कि सम्बन्धित आय की प्राप्त राशि में उतनी राशि और जोड़ दें जो कर की राशि उद्गम स्थान पर काट ली गई है। Gross up करने के सूत्र इसी अवधारणा पर आधारित हैं। संक्षेप में, शुद्ध प्राप्ति एवं सकल आय की व्याख्या निम्नलिखित प्रकार की जा सकती है

शुद्ध प्राप्ति एवं सकल आय (Net Receipt and Gross Income)-उद्गम स्थान पर कर काटने से प्राप्तकर्ता की शुद्ध प्राप्ति उसकी आय से कम हो जाती है, अत: शुद्ध प्राप्ति में काटा गया कर पुन: जोड़ कर सकल कुल आय ज्ञात की जाती है। ।

भुगतान प्राप्तकर्ता के PAN की व्यवस्था (PAN of Receipient)-आय-कर अधिनियम में 01.04.2010 के पश्चात् होने वाले भुगतानों के सम्बन्ध में यह प्रावधान किया गया है कि यदि प्राप्तकर्ता भुगतान करने वाले को भुगतान से पूर्व अपना PAN प्रदान न करे तो भुगतानकर्ता को 20% की दर से उद्गम स्थान पर कर की कटौती करनी होगी चाहे आय-कर अधिनियम में इससे कम दर पर कर काटने का उल्लेख हो। अत: प्राप्तकर्ता को सदैव अपना PAN उपलब्ध करवा देना चाहिये इससे उसके नाम से जमा कर का लाभ देना भी आसान हो जायेगा। उद्गम स्थान पर कर की कटौती से सम्बन्धित प्रावधान आय-कर अधिनियम की धारा 190 से 206 में दिये गये हैं।

Deduction Collection Income Tax

महत्त्वपूर्ण भुगतानों में से उद्गम स्थान पर कर की कटौती के प्रावधान

वेतन में से उद्गम स्थान पर कर की कटौती

(Deduction of Tax at Source from Salaries) 

वेतन का भुगतान करने वाले नियोक्ता का यह कर्तव्य है कि वह वित्तीय वर्ष में लागू दरों के अनुसार वेतन शीर्षक की अनुमानित आय पर उद्गम स्थान पर कर की कटौती करे। इस सम्बन्ध में कुछ प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं

1 उद्गम स्थान पर कर की कटोती तभी की जायेगी जब वेतन शीर्षक की अनुमानित आय न्यूनतम कर देय सीमा से अधिक हो। वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए यह सीमा 2,50,000 ₹ की है तथा 60 वर्ष या अधिक परन्त 80 वर्ष से कम आय वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 3,00,000₹ है। 80 वर्ष या अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 5 लाख ₹ है। 5,00,000 ₹ तक का आय पर 5%, इसके बाद 5,00,000 ₹ से 10,00,000 ₹ तक की आय पर 900 एवं 10.00.000₹ के बाद शेष आय पर 30% की दर से आय-कर चकाना है। 01.04.2018 से देय आय-कर पर 40% की दर से स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर (HEC) चुकाया जायेगा। गत वर्ष 2018-19 हेत वेतन से आय की गणना करने मे 40,000 ₹ की Standard Deduction दी जाएगी। वेतन से आय की गणना वतन से आय से सम्बन्धित प्रावधानों के अनुसार की जाती है। कर की गणना की विस्तृत विवेचना हेतु पेज 671-672 देखें।

उद्गम स्थान (स्रोत) पर आय-कर की कटौती एवं संग्रह

2. यदि कर्मचारी एक से अधिक नियोक्ताओं से वेतन प्राप्त कर रहा है. तो सभी नियोक्ताओं से प्राप्त राशियों के आधार पर कुल आय ज्ञात की जाएगी। कर कटौती के लिए कर्मचारी एक या अधिक नियोक्ता को अधिकृत कर सकता है। एस अधिकृत नियोक्ता कर की कटौती के लिए उत्तरदायी होंगे।

3. मकान किराया भत्ता के सम्बन्ध में छट

(i) यदि मकान किराये भत्ते की राशि 3,000 ₹ मासिक से अधिक नहीं है तो नियोक्ता बिना किराए की रसीद के कर्मचारी के कथन के आधार पर मकान किराया भत्ता की रकम को कर-मुक्त मान सकता है।

(ii) यदि मकान किराया भत्ता 3,000 ₹ मासिक से अधिक है तो नियोक्ता भुगतान किये गये किराये की रसीद दिये जाने पर ही धारा 10/13A) में वर्णित नियमों के अनुसार मकान किराये भत्ते की प्राप्त राशि के सम्बन्ध में कर-मुक्त राशि तय करेगा।

(iii) यदि वार्षिक किराया एक लाख र से अधिक है तो कर्मचारी नियोक्ता को मकान मालिक का PAN बताएगा।

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4. यदि कर्मचारी चाहे तो अपनी अन्य सभी आयें नियोक्ता को बताकर उद्गम स्थान पर कर कटवा सकता है किन्तु यदि अन्य किसी शीर्षक में हानि है तो ऐसी हानियों को वेतन से समायोजित नहीं किया जाएगा, किन्तु स्वयं के आवास हेतु लिये गये ऋण के ब्याज की राशि को घटाया जा सकेगा।

5. यदि कर्मचारी शासकीय, अर्द्धशासकीय, कम्पनी, सहकारी समिति, विश्वविद्यालय या व्यक्तियों के संघ के यहाँ कार्यरत है व पुराना बकाया (Arrear) वेतन प्राप्त किया है जिस पर पूर्व में कर न लगा हो तो कर्मचारी को धारा 89(1) की राहत भी प्रदान की जाएगी किन्तु इस हेतु कर्मचारी को निर्धारित प्रारूप में सत्यापित विवरण नियोक्ता को प्रस्तुत करना होगा।

6. उद्गम स्थान पर काटे जाने वाले कर की राशि को बराबर की मासिक किश्तों में काटा जाना चाहिए। यदि अनुमानित वेतन में किसी कारण से परिवर्तन हो जाता है, तो अनुमानित वेतन एवं कर की गणना पुनः करके शेष किश्तों में समायोजन कर लेना चाहिए।

7. यदि वेतन का भुगतान विदेशी मुद्रा में किया जाए, तो उसे ₹ में परिवर्तित करके कर की गणना की जायेगी।

8. कटौती के पश्चात् कर की राशि को केन्द्रीय सरकारी कोषालय या स्टेट बैंक में निम्नलिखित तिथि को जमा कराना होगा-(अ) भुगतानकर्ता सरकार है तो वेतन भुगतान के दिन (ब) अन्य भुगतानकर्ता की दशा में वेतन भुगतान के 7 दिनों में।

9. नियोक्ता कर्मचारी को उद्गम स्थान पर काटे गये कर का प्रमाण फार्म संख्या 16 में देगा। यह प्रमाण-पत्र जिस वित्तीय वर्ष में कर की कटौती की गई है उसकी समाप्ति के तुरन्त बाद वाले वित्तीय वर्ष की 31 मई तक देना होगा।

कर्मचारी द्वारा धारा 192 के अन्तर्गत कर गणना के लिए वेतन आय में से कटौती के लिए साक्ष्य देना 101.06.2016 से प्रभावी] (नियम 26C) यदि कर्मचारी निम्नलिखित के सम्बन्ध में वेतन आय में से कटौती की मांग करता है तो उसे अपने नियोक्ता को फॉर्म नं० 12BB में विवरण या साक्ष्य देना होगा

1 गत वर्ष में एक लाख से अधिक मकान किराया देना।

2. अवकाश यात्रा रियायत।

3. ‘मकान-सम्पत्ति से आय’ शीर्षक में ब्याज की कटौती।

4. धारा 80C से 800 में कटौतियां।

वेतन शीर्षक के अन्तर्गत उद्गम स्थान पर कर न काटने के परिणाम-ऐसी दशा में नियोक्ता को ‘चूक में करदाता’ (Assessee in Default) माना जायेगा अर्थात् यह उसकी जिम्मेदारी बन जाएगी कि इस प्रकार न काटी गई कर की रकम को स्वयं अपने पास से सरकारी कोष में जमा कराये।

(II) प्रतिभूतियों के ब्याज में से उद्गम स्थान पर कर की कटौती (Deduction of Tax at Source from Interest on Securities) [धारा 193] – प्रतिभूतियों पर ब्याज चुकाने वाले व्यक्ति का यह दायित्व है कि वह घरेलू कम्पनी या भारत में निवासी व्यक्ति को ब्याज का भुगतान करते समय भुगतान की जाने वाली ब्याज की राशि में से चालू वित्तीय वर्ष हेतु निर्धारित दर से आय-कर काट ले और उसे राजकीय कोष में जमा करा दे। ब्याज.खाते में जमा करते समय या नकद/चैक/डाफ्ट द्वारा भुगतान करते समय (दोनों में से जो भी तारीख पहले पड़ रही हो) यह कर काटा जायेगा। इस सम्बन्ध में की गई कर की कटौती का प्रमाण-पत्र फार्म नम्बर 16A में दिया जाता है।

कर को जमा करानायदि ब्याज पर कर की कटौती सरकार की ओर से की गई हो, तो कटौती वाले दिन ही कोषालय में राशि जमा की जानी चाहिए। अन्य दशा में जिस माह में कटौती की गई हो, उस माह की अन्तिम तिथि से एक सप्ताह के अन्दर। कर की राशि कोषालय में भुगतानकर्ता द्वारा जमा करा देना चाहिए। ।

कुछ प्रतिभूतियों पर कर की कटौती नहीं-कछ विशेष प्रतिभतियों, बॉण्डों एवं प्रमाण-पत्रों के ब्याज पर उदगम स्थान पर। कर का कटोती नहीं की जाती है। इनकी विस्तृत विवेचना अध्याय 14 ‘अन्य साधनों से आय’ में की गई है।

एक कम्पनी जिसमें जनता का सारवान हित है द्वारा निर्गमित ऋणपत्रों (चाहे उक्त ऋण पत्र सूचीबद्ध हों अथवा नहीं ) पर एक व्यक्ति अथवा हिन्दू अविभाजित परिवार को आदाता के खाते में देय चैक (Account Pavee Cheque) के द्वारा। भुगतान किये जाने वाले ब्याज की राशि 5,000 से अधिक नहीं है तो उद्गम स्थान पर कर की कोई कटौती नहीं की जायेगी (वित्त अधिनियम, 2012 के द्वारा दिनांक 01.07.2012 से प्रभावी)

नोट-वित्तीय वर्ष 2017-18 में प्रतिभूतियों के व्याज में से उद्गम स्थान पर कर की कटौती 10% की दर से की जानी है। यदि व्याज का भुगतान प्राप्त करने वाला व्यक्ति कर-निर्धारण अधिकारी को फॉर्म संख्या 13 में आवेदन करके कर-निर्धारण अधिकारी से फॉर्म संख्या 15AA में एक प्रमाण-पत्र प्राप्त कर लेता है जो कि ब्याज का भुगतान करने वाले व्यक्ति को निर्धारित दर से कर न काटने के बजाए कम दर से काटने के लिए अधिकृत करता है, तो ऐसी दशा में ब्याज का भुगतान करने वाला व्यक्ति इस प्रमाण-पत्र में उल्लिखित दर से कर की कटौती करेगा।

(III) लाभांश से आय (Income from Dividend) [धारा 194]-सामान्यतया भारतीय कम्पनी से प्राप्त लाभांश पर कोई भी कर की कटौती नहीं होती है परन्तु यदि एक घरेलू कम्पनी ने धारा 2(22)(e) के अन्तर्गत लाभांश घोषित किया है, तो लाभांश भुगतान करने से पूर्व 10% (यदि PAN उपलब्ध नहीं कराया है तो 20%) की दर से उद्गम स्थान पर कर की कटौती की जाएगी।।

अपवाद-निम्नलिखित परिस्थितियों में उक्त लाभांश पर उद्गम स्थान पर कर की कटौती नहीं की जाएगी

(i) यदि लाभांश का भुगतान एक व्यक्ति करदाता को खातों में जमा होने वाले चैक के माध्यम से किया जाए व गत वर्ष में लाभांश की राशि 2,500 ₹ से अधिक न हो तो उद्गम स्थान पर कर की कटौती नहीं की जाएगी।

(ii) यदि लाभांश का भुगतान एक भारतीय निवासी व्यष्टि को किया जा रहा है व करदाता फॉर्म 15G में घोषणा कर दे कि उसकी आय कर-योग्य सीमा से अधिक नहीं होगी तथा गत वर्ष में समस्त कर-योग्य लाभांश व ब्याज की राशि का योग 50,000 ₹ से अधिक नहीं होगा।

(iii) यदि दिया गया लाभांश धारा 2(22)(e) में संदर्भित लाभांश नहीं है।

(IV) प्रतिभूतियों पर ब्याज के अतिरिक्त अन्य ब्याज (Interest other than Interest on Securities) [धारा 194A]-प्रतिभूतियों पर ब्याज के अतिरिक्त अन्य किसी ब्याज का भुगतान करने वाले व्यक्ति (जो व्यष्टि अथवा हिन्दू अविभाजित परिवार न हो) का यह कर्त्तव्य है कि वह ऐसे ब्याज की राशि का भुगतान करते समय 10% की दर से (यदि ब्याज प्राप्तकर्ता भगतानकर्ता को अपना PAN उपलब्ध नहीं कराता है तो उद्गम स्थान पर कर की कटौती दर 20%) होगी। आय कर की कटौती करे बशर्ते कि चालू वित्तीय वर्ष में उस व्यक्ति को देय ब्याज की कुल राशि निम्नलिखित सीमा से अधिक हो

() बैंक की स्थायी जमाओं पर ब्याज का भुगतान-यदि किसी बैंक द्वारा स्थायी जमा (Fixed Deposit) अथवा अवधि जमा (Term Deposit) पर 10,000 से अधिक ब्याज का भुगतान किया जाना है तो उस पर 10% कर की कटौती की जायेगी। ब्याज का भुगतान पाने वाले द्वारा फार्म 15G/15H देने पर कर की कोई कटौती नहीं की जायेगी। बचत बैंक खाते (Saving Bank Account) में जमा राशि पर देय ब्याज के सम्बन्ध में कर की कोई कटौती नहीं की जाती है।

() यदि ब्याज का भुगतान बैंक (सहकारी बैंक सहित)/पोस्ट ऑफिस द्वारा वरिष्ठ नागरिकों की जमाओं पर किया जाए तो ऐसे ब्याज पर उद्गम स्थान पर कर की कटौती तभी होगी जब देय/भुगतान किये जाने वाले ब्याज की कुल धनराशि 50,000₹ (01.04.2018 से प्रभावी) से अधिक हो। वरिष्ठ नागरिक उसे माना जायेगा जिसकी आयु गत वर्ष में किसी भी समय 60 वर्ष या अधिक हो।

() अन्य सभी दशाओं में यदि ब्याज की राशि 5,000 ₹ से अधिक हो।

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वित्त विधेयक, 2015 द्वारा किये गये संशोधन दिनांक 01.06.2015 से प्रभावी-(i) आवर्तक जमाओं (Recuring Deposits) को भी स्थायी जमाओं की परिभाषा में शामिल कर लिया गया है, (ii) स्थायी जमाओं पर भुगतान किये जाने वाले ब्याज के सम्बन्ध में किसी भी बैंक की प्रत्येक शाखा द्वारा भुगतान किये जाने वाले ब्याज के स्थान पर उस बैंक की समस्त शाखाओं द्वारा दिये जाने वाले ब्याज की राशि 10,000 ₹ (01.04.2018 से वरिष्ठ नागरिक की दशा में 50,000 ₹) से अधिक होने पर ही कर की कटौती की जायेगी।

एक व्यक्ति अथवा एच० यू०एफ० की दशा में उसके द्वारा कर की कटौती तभी की जाएगी जब सम्बन्धित व्यक्ति या एच० यू० एफ० की कुल बिक्री अथवा सकल प्राप्तियाँ ब्याज भुगतान करने वाले वित्तीय वर्ष से तुरन्त पूर्व के वित्तीय वर्ष में एक करोड़ ₹ से अधिक हैं अथवा पेशे से सकल प्राप्तियाँ 25 लाख ₹ से अधिक हों।

(V) लॉटरी या वर्ग पहेली,टी० वी० गेम शो आदि के इनाम से आय [धारा 194B]-लॉटरी अथवा पहेली की ईनाम की राशि का भुगतान करने वाले व्यक्ति का यह दायित्व है कि यदि वह 10,000₹ से अधिक के इनाम की राशि (1 जुलाई, 2010 से प्रभावी) का भुगतान घरेलू कम्पनी या किसी निवासी व्यक्ति को कर रहा है तो सम्पूर्ण इनाम की राशि पर 30% की दर से उद्गम स्थान पर कर की कटौती करे। यदि इनाम आंशिक नकद तथा आंशिक वस्तु के रूप में दिया जा रहा है तो दोनों इनामों के कल मूल्य पर नकद राशि में से उद्गम स्थान पर कर की कटौती की जाएगी। यदि इनाम की नकद राशि कर की कटौती के लिए पर्याप्त नहीं है तो जो व्यक्ति इनाम का भुगतान कर रहा है उसे अपने आप को सन्तुष्ट करना होगा कि इनाम के प्राप्तकर्ता द्वारा कर चूका दिया गया है या वह प्राप्तकर्ता से इस राशि पर कर वसूल करके ही इनाम देगा।

(VI) घुड़दौड़ से जीती गई राशि (Winnings from Horse Race) [धारा 194BB]-घड़दौड़ के इनाम की राशि का भगतान करने वाले व्यक्ति का यह दायित्व है कि यदि वह घरेलू कम्पना या किसी निवासी व्यक्ति को 5.000₹ जन.2016 से 10.000₹) से अधिक के इनाम का भुगतान कर रहा है तो भुगतान की जाने वाली इनाम की पूर्ण राशि पर 30% की दर से। मधाम स्थान पर कर की कटौती करे। यदि इनाम वस्तु के रूप में ह तो इनाम देने वाला इनाम नहीं देगा जब तक कि वह इनाम प्राप्तकर्ता से TDS की राशि वसूल कर ले या प्राप्तकर्ता सरकारी खजाने में TDS की धनराशि जमा न करो

(VI) ठेकेदार उपठेकेदारों को भुगतान (Payments to contractors and sub-contractors) धारा। 194C]-यदि कोई व्यक्ति किसी ऐसे निवासी ठेकेदार को कोई भुगतान करता है जिसने निम्नलिखित ‘विशिष्ट व्यक्तियों’ के साथ हुए अनुबन्ध के अन्तर्गत कोई कार्य (work) किया है (किसी कार्य के लिए श्रम पूर्ति करने के कार्य सहित) तो वह । व्यक्ति एसा भुगतान करते समय अथवा ऐसी राशि को ठेकेदार के खाते में जमा करते समय धारा 194C के अन्तर्गत कर की। कटौती करने के लिए उत्तरदायी ठहराया गया है। इस सम्बन्ध में TDS के अन्य प्रावधानों की विवेचना करने से पूर्व विशिष्ट व्यक्ति, ठेकेदार एवं ठेका कार्य का अर्थ समझना आवश्यक है।

() विशिष्ट व्यक्ति (Specified Person)-धारा 194C के उद्देश्य हेतु विशिष्ट व्यक्तियों में-(i) केन्द्रीय अथवा राज्य सरकार, (ii) स्थानीय सत्ता, (iii) वैधानिक निगम, (iv) कोई कम्पनी, (v) कोई सहकारी समिति, (vi) कोई प्राधिकरण, जिसका मुख्य कार्य गाँवों एवं शहरों का नियोजन, विकास एवं सुधार करना हो. (vii) कोई पंजीकृत समिति, (viii) कोई ट्रस्ट, (ix) कोई मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय, (x) किसी फर्म, (xi) किसी विदेशी राज्य की सरकार या विदेशी उद्यम या भारत के बाहर स्थापित कोई उद्यम (xii) व्यक्तियों का संघ (AOP) या व्यक्तियों का समूह (BOD, चाहे निगमित हो या नहीं, (जो उपरोक्त वाक्यांशों में नहीं आते) जिनके खातों का धारा 44AB के अन्तर्गत अंकेक्षण अनिवार्य है। अथवा (xiii) एक व्यक्ति (individual) या हिन्दू अविभाजित परिवार जिनक खाता का धारा 44AB के अन्तर्गत अंकेक्षण अनिवार्य है, को शामिल किया गया हो ।

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()ठेकेदारमें ऐसे ठेकेदार भी शामिल होंगे जो ठेकेदार तथा किसी विदेशी सरकार अथवा विदेशी प्रतिष्ठान अथवा कोई एसोसिएशन अथवा भारत के बाहर स्थापित कोई निकाय के बीच में हुए किसी अनुबन्ध के अन्तर्गत किसी भी कार्य को करने हेतु श्रमिकों की पूर्ति करने का कार्य करते हों।

() ठेका कार्य में विज्ञापन, आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के प्रोग्राम बनाना व प्रसारण करना, भोजन व्यवस्था (Catering) के ठेके एवं रेलवे के अतिरिक्त अन्य किसी साधन से माल व यात्रियों को ले जाना शामिल है। ठेके में उप-ठेका भी शामिल है।

नोट-धारा 194C के अन्तर्गत कर की कटौती तभी की जायेगी जब किसी ठेकेदार या उप-ठेकेदार को किसी ठेके के सम्बन्ध में भुगतान की जाने वाली एकल राशि 30,000 ₹ (एक जुलाई, 2010 से प्रभावी ) से अधिक हो अथवा वित्तीय वर्ष में भुगतान की जाने वाली कुल राशि 1,00,000 ₹ (1 जून, 2016 से प्रभावी) से अधिक हो। दूसरे शब्दों में, धारा 194C के अन्तर्गत निम्नलिखित दशाओं में कर की कटौती नहीं की जायेगी-(i) जब भुगतान की गई अथवा जमा की गई एक मुश्त राशि 30,000 से अधिक नहीं है; (ii) जब वित्तीय वर्ष में

भुगतान की गई अथवा जमा की गई कुल राशियों का योग 1,00,000 (1 जून, 2016 से प्रभावी)र से अधिक नहीं है। यदि निम्नलिखित शर्ते पूरी होती हैं तो भी स्रोत पर आय-कर की कटौती नहीं की जायेगी(अ)जब किसी ठेका कार्य का भुगतान निवासी ठेकेदार द्वारा किसी निवासी एक व्यक्ति उप-ठेकेदार को किया जाता है या किया जाना है।

() ऐसा भुगतान उप-ठेकेदार को माल वाहन (Goods carriage) को चलाने, किराये अथवा पट्टे पर देने के व्यापार के दौरान किया गया है अथवा किया जाना है।

() यदि परिवहन ठेकेदार (Transport Contractor) भुगतान करने वाले को अपना PAN उपलब्ध कराता है।

() यदि व्यक्ति या हिन्दू अविभाजित परिवार ठेकेदार को अपने निजी कार्य या परिवार के सदस्य के निजी कार्य के लिए कोई भुगतान करता है।

() यदि कोई ठेकेदार करदाता, गत वर्ष में किसी भी समय 10 या 10 से कम माल वाहनों को चलाने, किराये पर देने या पट्टे पर देने के व्यापार में संलग्न है, भुगतान देने वाले व्यक्ति को अथवा भुगतान की जाने वाली राशि ठेकेदार के खाते में क्रेडिट करने वाले व्यक्ति को स्थायी खाता संख्या (PAN) के साथ कर की कटौती न करने की घोषणा प्रस्तुत करता है तो धारा 194C के अन्तर्गत कर की कोई कटौती नहीं की जायेगी। वित्त विधेयक, 2015 द्वारा 01.06.2015 से

प्रभावी घारा 194C के अन्तर्गत कर की कटौती किये जाने की दर-धारा 194C के अन्तर्गत कर की कटौती निम्नलिखित दरों से की जायेगी

1 एक व्यक्ति (Individual या हिन्द अविभाजित परिवार को भगतान की गई राशि या खाते में जमा की गई राशि पर एक प्रतिशत (1%);

2. किसी अन्य व्यक्ति को भुगतान की गई राशि या खाते में जमा की गई राशि पर दो प्रतिशत (2%)1

(VIII) बीमा कमीशन (Insurance Commission) [धारा 194D-ए कमीशन अथवा अन्य कोई पारिश्रमिक बीमा व्यापार लाने अथवा नवीनीकरण कराने के प्रतिफल में देने वाले का दायित्व है कि वह ऐसी आय को भुगतान प्राप्तकर्ता के खाते में जमा करते समय अथवा भुगतान करते समय दाना मस पड़ रहा हो) ऐसी आय पर 10% की दर से कर की कटौती कर ले। यदि किसी वित्तीय वर्ष म एसा आय IOUS 2016 से प्रभावी) से अधिक नहीं है तो उद्गम स्थान पर कर का कट कमीशन प्राप्त करने वाला घरेलू कम्पनी के अतिरिक्त एक निवासी व्यक्ति होता नही हैं तो उद्गम स्थान पर कर की कटौती नहीं की जायेगी। इसके अतिरिक्त यदि बीमा। की कटौती की जायेगी।

 (IN) जीवन बीमा पॉलिसी के गैर करमुक्त भुगतानों के सम्बन्ध में उद्गम स्थान पर कर की कटौती (TDS from non-exempt payments made under life insurance policy) Section 194DA] [w.e.f. 1.10.2014]-धारा 10(10D) में कर-मुक्त जीवन बीमा पॉलिसी के अतिरिक्त अन्य जीवन बीमा पॉलिसी का भुगतान करते समय बोनस सहित देय परिपक्वता मुल्य पर 1 जून, 2016 से 1% की दर से उद्गम स्थान पर कर की कटौती की जायेगी। यदि किसी करदाता को एक वित्तीय वर्ष में कुल मिलाकर 1 लाख से कम का भुगतान किया जाता है तो उद्गम स्थान पर कर की कोई कटौती नहीं की जायेगी।

(x) अनिवासी खिलाड़ी एवं संघों को भुगतान में से उद्गम स्थान पर कर की कटौती (Deduction of tax at source from payment to non-resident sportsmen and Sports Association) [धारा 194E]-किसी अनिवासी खिलाडी को. जो भारत का नागरिक नहीं है, किसी आय का भुगतान करने वाले व्यक्ति का यह दायित्व है कि भुगतान की जाने वाली राशि को भुगतान प्राप्तकर्ता के खाते में जमा करते समय अथवा भुगतान करते समय (दोनों में जो भी पहले हो) पर 20% की दर से आय-कर + सरचार्ज (यदि लागू हो) एवं 3% की दर से E.C. and S.H.E.C. की उदगम स्थान पर कर की कटौती करे बशर्ते खिलाड़ी को आय भारत में खेल में भाग लेने अथवा विज्ञापन से अथवा खेल के सम्बन्ध में भारत में किसी समाचार-पत्र अथवा पत्रिका में लेख लिखने से हुई हो।

इसी प्रकार यदि किसी अनिवासी खेल सध अथवा संस्था को भारत में खेले गए किसी खेल के सम्बन्ध में जो गारण्टी राशि देय है, उसमें से भी भुगतान करने वाले को उद्गम स्थान पर 10.3% की दर से कर की कटौती करनी होगी।

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(XI) राष्ट्रीय बचत योजना में जमा राशि के भुगतान के समय कटौती (Deduction of tax from payment in respect of National Saving Scheme) [धारा 194 EE] -यदि करदाता ने धारा 80 CCA के अन्तर्गत पोस्ट ऑफिस राष्ट्रीय बचत योजना में कोई राशि जमा की हो, तो इस राशि को वापस निकालने पर भुगतान करने वाले व्यक्ति का यह दायित्व है कि वह ऐसा भुगतान करते समय 10% (1 जून, 2016 से प्रभावी) की दर से आय-कर काट ले। यदि एक वित्तीय वर्ष में कल भुगतान की राशि 2.500 ₹ से अधिक नहीं हो अथवा भुगतान करदाता के उत्तराधिकारियों को किया जा रहा है तो कर की कटौती नहीं की जायेगी।

(XII) लॉटरी के टिकटों को बेचने के सम्बन्ध में कमीशन आदि पर कर की कटौती [धारा 194G]-लॉटरी के टिकटों का स्टॉक रखने वाले या बेचने वाले व्यक्ति को 15,000 ₹ (1 जून, 2016 से प्रभावी) से अधिक कोई कमीशन, पारिश्रमिक अथवा इनाम का भुगतान करने वाले का कर्तव्य है कि वह ऐसे भुगतान करते समय या खाते में जमा करते समय (दोनों में जो भी तारीख पहले पड़ रही हो), इसमें से 5% (1 जून, 2016 से प्रभावी) की दर से कर काट ले।

(XIII) कमीशन या दलाली [धारा 194H-यदि एक व्यक्ति (individual) या हिन्दू अविभाजित परिवार जिसे धारा 44AB के अन्तर्गत अपने खातों का अंकेक्षण कराना अनिवार्य है तथा अन्य करदाता जो बीमा कमीशन को छोड़कर अन्य कोई कमीशन या दलाली का किसी निवासी को भुगतान करता है या खाते में जमा करता है (दोनों में जो भी तारीख पहले पड़ रही हो), का यह दायित्व है कि वह इस राशि पर 5% (1 जून, 2016 से प्रभावी) की दर से कर काट ले बशर्ते कि वित्तीय वर्ष में कमीशन या दलाली की कुल राशि 15,000 ₹ (1 जून, 2016 से प्रभावी) से अधिक हो।

नोटBSNL या MTNL द्वारा PCO धारकों को जो कमीशन दिया जाता है उस पर उद्गम स्थान पर कर की कटौती नहीं होगी।

(XIV) किराये के भुगतान पर कर की कटौती धारा 194-1]-एक व्यक्ति अथवा हिन्दू अविभाजित परिवार जिसे धारा 44AB के अन्तर्गत अपने खातों का अंकेक्षण कराना अनिवार्य है तथा अन्य करदाता यदि भारत में निवासी को एक वित्तीय वर्ष में 1.80.000₹ (1 जुलाई, 2010 से प्रभावी) से अधिक किराये की राशि का भुगतान करता है तो उद्गम स्थान पर कर की कटौती दर निम्नलिखित प्रकार होगी

(i) मशीन, प्लाण्ट एवं उपकरण हेतु 2%, (ii) भूमि, भवन, फर्नीचर एवं फिटिंग्स 10% नोट- भुगतान प्राप्तकर्ता द्वारा PAN नहीं दिये जाने पर उपरोक्त दोनों दशाओं में 20%.

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(XV) अचल सम्पत्ति के क्रय पर कर की कटौती (TDS on Purchase of Immovable Property) [धारा 194IA] 101.06.2013 से प्रभावी-यदि कोई हस्तान्तरिती (क्रेता) गत वर्ष में भारत में ग्रामीण क्षेत्र में स्थित कृषि भूमि के अतिरिक्त अन्य कोई अचल सम्पत्ति जिसकी प्रतिफल राशि 50 लाख से अधिक है, क्रय करने के बदले निवासी हस्तान्तरणकर्ता (विक्रेता) को भगतान करता है तो हस्तान्तरिती (क्रेता) का यह दायित्व होगा कि वह नकदी में अथवा चैक या ड्राफ्ट या अन्य किसी तरीके से भगतान करते समय या ऐसी राशि को हस्तान्तरणकर्ता के खाते में जमा करते समय (जो भी तारीख पहले पड़ रही। हो) भुगतान की जाने वाली राशि पर 1% की कटौती कर ले। हस्तान्तरणकर्ता द्वारा पेन नम्बर न दिये जाने पर 20% की दर से कर की कटौती की जायेगी।

XVI) पेशेवर या तकनीकी सेवाओं के लिए फीस धारा 194(J)]-एक व्यक्ति अथवा हिन्द अविभाजित परिवार जिसे धारा 44AB के अन्तर्गत अपने खातों का अंकेक्षण कराना अनिवार्य है के अलावा यदि कोई अन्य व्यक्ति किसी निवासी को पेशेवर अथवा तकनीकी सेवाओं के लिए किसी फीस की राशि का भुगतान करता है तो भुगतान की जाने वाली राशि में से 10% (यदि प्राप्तकर्ता PAN उपलब्ध न कराए तो 20%) की दर से उद्गम स्थान पर कर की कटौती की जाएगी। यदि एक वित्तीय वर्ष में भुगतान की जाने वाली उपर्युक्त राशि 30,000 ₹ (1 जुलाई, 2010 से प्रभावी) से अधिक नहीं है तो उद्गम स्थान पर कर की कटौती नहीं की जाएगी।

किसी कम्पनी के संचालक को धारा 192 के अन्तर्गत जिस राशि पर (वेतन के रूप में देय राशि पर) कर की कटौती की जानी है, उसके अतिरिक्त भुगतान की जाने राशि (जिसे पारिश्रमिक, फीस अथवा कमीशन किसी भी नाम से पुकारा जाये) पर 10% की दर से कटौती की जायेगी।(वित्त अधिनियम, 2012 के द्वारा दिनांक 01.07.2012 से प्रभावी)।

(XVII) अचल सम्पत्ति के अनिवार्य अधिग्रहण पर क्षतिपूर्ति का भुगतान [धारा 194(LAL-यदि किसी अचल मापत्ति का किसी अधिनियम के अन्तर्गत अनिवार्य अधिग्रहण किया गया है व इस पर कोई क्षतिपूर्ति अथवा बढ़ायी हुई क्षतिपूर्ति भुगतान भारत में निवासी व्यक्ति को किया जाता है एवं भुगतान की गयी राशि 2.50.000₹ (1 जन, 2016 से प्रभावी) से। अधिक है तो भुगतानकर्ता ऐसी सम्पूर्ण राशि पर 10% (PAN न देने पर 20%) की दर से उदगम स्थान पर कर की कटौती करेगा।

अचल सम्पत्ति, कृषि भूमि है (चाहे वह शहरी क्षेत्र में हो या ग्रामीण क्षेत्र में) तो कर की कटौती नहीं की जाएगी। यहाँ पर अचल सम्पत्ति से आशय कृषि भूमि को छोड़कर अन्य भूमि या भवन अथवा भवन के भाग से है।

(XVIID अवसंरचना ऋण कोष से ब्याज की आय (Income by way of Interest from infrastructure debt Fund) [धारा 194LB] [वित्त अधिनियम 2011 के द्वारा 1-6-2011 से प्रभावी-यदि धारा 10(47) में संदर्भित अवसंरचना गण कोष से ब्याज के रूप में हुई आय जो एक अनिवासी (जो कम्पनी नहीं है) अथवा विदेशी कम्पनी को देय है तो ऐसी दशा में व्याज को भगतान करने वाले का यह दायित्व होगा कि वह नकदी (cash) में अथवा चैक या डाफ्ट या अन्य किसी तरीके से भगतान करते समय (जो भी तारीख पहले पड़ रही हो) भुगतान की जाने वाली राशि पर 5% + सरचार्ज (यदि लाग हो) एवं EC and SHEC की 3% दर से आय-कर की कटौती करके सरकारी कोष में जमा करेगा।

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MIX भारतीय विनिर्दिष्ट कम्पनी द्वारा अनिवासी/विदेशी कम्पनी को ब्याज का भुगतान (Interest to a non-resident/foreign company by an Indian Specified Company) [धारा 194LC दिनांक 01-07-2012 से प्रभावी-वित्त अधिनियम, 2012 के द्वारा धारा 194LC को शामिल किया गया है। धारा 194LC हेतु भारतीय विनिर्दिष्ट कम्पनी द्वारा किसी अनिवासी (जो कम्पनी नहीं है) अथवा विदेशी कम्पनी को उधार ली गई राशि पर देय ब्याज के सम्बन्ध में केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित ब्याज की राशि को आदाता के खाते में जमा किये जाने की तिथि पर अथवा रोकड़ या चैक या ड्राफ्ट या अन्य किसी तरीके से भुगतान किये जाने के समय (इनमें जो भी तारीख पहले पड़ रही हो) भुगतान की जाने वाली ब्याज की राशि में से 5% की दर से कटौती की जायेगी।

धारा 194LC के उद्देश्य हेतु भारतीय विनिर्दिष्ट कम्पनी से आशय ऐसी भारतीय कम्पनी से है जिसने 01.07.2012 को या इसके पश्चात् परन्तु 01.07.2017 से पूर्व भारत के बाहर से विदेशी मुद्रा में इस सम्बन्ध में केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित किसी ऋण अनुबन्ध के अन्तर्गत अथवा दीर्घकालीन अवसंरचना बॉण्डस को निर्गमित करके रकम उधारली हो।

(XX) कुछ निश्चित बॉण्ड्स एवं सरकारी प्रतिभूतियों पर दिये जाने वाले ब्याज के सम्बन्ध में कर की कटौती (T.D.S. on Interest on Certain Bonds and Government Securities) [धारा 194LD दिनांक 01-06-2013 से। प्रभावी]-कोई व्यक्ति जो विदेशी संस्थागत विनियोक्ता (Foreign Institutional Investor) अथवा योग्य विदेशी विनियोक्ता (Qualified Foreign Investor) को एक भारतीय कम्पनी के₹ में अभिधायी बॉण्ड अथवा सरकारी प्रतिभूति पर 31 मई 2013 क पश्चात् परन्तु 1 जून, 2015 से पूर्व देय ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी हे (ब्याज की दर ब्याज की अधिसूचित दर से अधिक न हो) ब्याज का भुगतान करते समय अथवा ब्याज की राशि को प्राप्तकर्ता के खाते में जमा करते समय (दोनों में से जो भी तारीख पहले पड़ रही हो) भुगतान की जाने वाली राशि पर 5% + अधिभार + शिक्षा उपकर की दर से कर की कटौती करेगा। यदि Deductee के पास पैन नम्बर नहीं है तो 20% की दर से कर की कटौती की जायेगी।

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उद्गम स्थान पर कर की कटौती/कर के संग्रह के सम्बन्ध में अन्य महत्त्वपूर्ण प्रावधान

(Other Important Provisions Regarding TDS/TCS)

1 अनिवासियों को किए गए अन्य भगतान (Other sums paid to non-residents) [धारा 195] -धारा 195 का अन्तर्गत, अनिवासियों को (कम्पनियों तथा विदेशी कम्पनियों को छोडकर) प्रतिभतियों पर ब्याज के अतिरिक्त अन्य काइ ब्याज। अथवा वेतन या लाभांश जो धारा 1150 में वर्णित है, के अतिरिक्त किए गए अन्य किसी भुगतान पर लागू दरों से भुगतान करने वाल को आय-कर काटना पड़ेगा सिवाय उस परिस्थिति के जिसमें वह स्वयं उस अनिवासी के एजेन्ट के रूप में एसे भुगतान पर। आय-कर देने के लिए उत्तरदायी हो।

2. सरकार/रिजर्व बैंक आदि को भुगतान [धारा 196]-यदि कोई धनराशि सरकार को या रिजर्व बैंक को या एक निगम का राजसका स्थापना केन्द्रीय अधिनियम के अन्तर्गत हुई है एवं जो आय-कर से मुक्त है) या पारस्परिक निधि [जिसका उल्लख। धारा 10(23D)] के अन्तर्गत किया गया है। को किया जाना है तो कोई कर की रकम नहीं काटी जायगा।

3. कम दर कर की कटौती करने का प्रमाण-पत्र धारा 1971-किसी व्यक्ति की आय पर यदि धाराए 192.193, 194, 194A, 194C, 194D, 194G, 194H, 1941, 194J तथा 194LA, 194LBB एव D, 194G, 1941, 1941, 194J तथा 194LA, 194LBB एवं 194LBC (01.06.2016 से प्रभावा) अथवा धारा 195 के अन्तर्गत कर की कटौती आय कर के प्रावधानों के अनुसार करना हूँ और करनान के प्रावधानों के अनुसार करनी है और कर-निर्धारण अधिकारी इस बात से सन्तुष्ट हो जाता है कि उस व्यक्ति की आय इतनी कम है कि उस पर कम दर से आयकर लगना आयकर नहीं लगना चाहिए तो करदाता द्वारा इस सम्बन्ध में प्रार्थना-पत्र पेश करने पर आय इतनी कम है कि उस पर कम दर से आयकर लगना चाहिए अथवा बिल्कुल ही प्रमाण-पत्र दे सकता है। ऐसी दशा में भुगतान करने वाला व्यक्ति उस प्रमाण-पत्र करदाता द्वारा इस सम्बन्ध में प्रार्थना-पत्र पेश करने पर कर-निर्धारण अधिकारी उसे उचित दाम भुगतान करने वाला व्यक्ति उस प्रमाण-पत्र में उल्लेखित दर से कर का कटाता करगा या कोई कर की कटौती नहीं करेगा।

4.वरिष्ठ नागरिकों के सम्बन्ध में आयकर की उदगम (स्रोत ) पर कटौती (Deduction of tax for senior citizens) धारा 197ATC)]-गत वर्ष में भारत में निवासी व्यक्ति जिसकी गत वर्ष में किसी भी समय आयु 65 वर्ष अथवा उससे अधिक । हवह आय का भुगतान करने वाले व्यक्ति को धारा 193 अथवा 194 अथवा 194A अथवा 194EE अथवा 194K के अन्तर्गत । निधारित फार्म में दो प्रतियों में निर्धारित विधि से सत्यापन करके लिखित घोषणा कर देता है कि गत वर्ष में उसकी अनुमानित कल। आय के सम्बन्ध में आय-कर का दायित्व शून्य होगा तो उसकी आय पर आय-कर की उद्गम (स्रोत) पर कटौती नहीं होगी।

5. कर की कटौती की राशि को आय माना जाना (Tax deduction deemed as income received) [धारा। 198]-यांद करदाता की किसी आय में से उद्गम स्थान पर कर की कोई कटौती की जाती है तो वह काटी गई राशि करदाता की। आय मानी जाती है और उसकी सम्बन्धित आय में शामिल की जाती है।

6. कटौती किये गये कर की राशि का सम्बन्धित करदाता को क्रेडिट प्रदान करना [धारा 199]-स्रोत पर की गई कर का कटौती और केन्द्रीय सरकार के पास जमा कराई गई राशि उस व्यक्ति की ओर से भुगतान कराई गई मानी जायेगी जिसकी। आय से स्रोत पर कर की कटौती की गई है तथा उसके अन्तिम कर-निर्धारण में इस रकम का क्रेडिट प्रदान किया जाता है।

7. कर की कटौती करने वाले का दायित्व (Duty of person deducting tax) [धारा 200]-कर की कटौती करने वाले का यह दायित्व है कि वह काटे गये कर की राशि को निर्धारित समय के अन्दर सरकार के खाते में स्टेट बैंक में अथवा खजाने में जमा करा दे एवं काटे गये कर को निर्धारित समय में केन्द्रीय सरकार के खाते में जमा करने के बाद प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 30 जून, 30 सितम्बर, 31 दिसम्बर एवं 31 मार्च तक समाप्त हुई अवधि में काटे गये कर का त्रैमासिक विवरण तैयार करके इस विवरण को प्राधिकृत आय-कर प्राधिकारी के पास निर्धारित सूचनाओं सहित निर्धारित समय में दाखिल कराए।

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