BCom 2nd Year Income Tax Penalties Offences prosecutions Study Material Notes in Hindi

BCom 2nd Year Income Tax Penalties Offences prosecutions Study Material Notes in Hindi

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BCom 2nd Year Cost Accounting Service and Operating Cost Study Material Notes In Hindi

अर्थदण्ड, अपराध एवं अभियोजन

(PENALTIES, OFFENCES AND PROSECUTIONS)

किसी भी अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने हेतु अर्थदण्ड, अपराध एवं अभियोजन की व्यवस्था होना परमावश्यक है। आय-कर अधिनियम में भी अर्थदण्ड (Penalties), अपराध (Offences) एवं अभियोजन (Prosecutions) की व्यवस्था की गयी है ताकि कर अपवंचना (Tax Evasion) न हो।।

अर्थदण्ड का अर्थ (Meaning of Penalty)-अर्थदण्ड से आशय उन करदाताओं पर अतिरिक्त मौद्रिक भुगतान का भार डालना है जो आय-कर अधिनियम में उल्लेखित प्रावधानों का अनुपालन नहीं करते हैं। अर्थदण्ड साधारण ब्याज अथवा जुर्माने के रूप में हो सकता है।

अपराध का अर्थ (Meaning of offence)-आय-कर अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन न करना, अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत कार्य करना अथवा अधिनियम के प्रावधानों को धोखा देने का कार्य करना अपराध है जिसके लिए अधिनियम में विभिन्न सजाओं का प्रावधान किया गया है। अपराध जान-बूझकर अथवा अनजाने में किया जा सकता है। अभियोजन (Prosecution) से आशय दोषी करदाता के विरुद्ध वाद प्रस्तुत करने से है।

Income Tax Penalties Offences

अर्थदण्ड लगाने के सामान्य सिद्धान्त

(General Principles for Imposing the Penalty)

1 अर्थदण्ड कब लगता है?-आयकर अधिनियम के भिन्न-भिन्न प्रावधानों की अवहेलना करने पर अधिनियम की भिन्न-भिन्न धाराओं के अन्तर्गत करदाता पर अर्थ-दण्ड लगाने का प्रावधान है।

2. अर्थदण्ड लगाने का विवेकीय अधिकार (Discretionary Power to Impose Penalty)-यद्यपि अधिनियम में न्यूनतम एवं अधिकतम अर्थ-दण्ड निर्धारित है, फिर भी सक्षम अधिकारी को परिस्थितियों पर विचार करते हुए विवेकानुसार अर्थ-दण्ड आरोपित करना चाहिए।

3.अर्थदण्ड की मात्रा (Quantum of Penalty)-यदि प्राधिकारी यह निश्चय करता है कि अर्थ-दण्ड लगाया जाये तो जहाँ न्यूनतम अर्थ-दण्ड निर्धारित है वहाँ उससे कम अर्थ-दण्ड नहीं लगाया जा सकता है। अर्थ-दण्ड की राशि वही होगी जो चूक करने के दिन प्रावधान था, न कि वह जो कर-निर्धारण वर्ष में प्रावधान हो। यदि किसी प्रावधान के अन्तर्गत अधिकतम अर्थदण्ड निर्धारित है, तो ऐसी दशा में निर्धारित राशि से अधिक राशि का अर्थदण्ड नहीं लगाया जा सकता।

4. अर्थदण्ड लगाने की कार्यविधि/प्रक्रिया (Procedure of Imposing Penalty) (धारा 274)

(1) अर्थ-दण्ड लगाने का अधिकार कर-निर्धारण अधिकारी को होता है, लेकिन धारा 271C, 271D एवं 271D के अन्तर्गत अर्थ-दण्ड लगाने का अधिकार डिप्टी कमिश्नर को होगा।

(ii) अर्थ-दण्ड लगाने के पूर्व करदाता को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर प्रदान किया जाना चाहिए, अन्यथा लगाया गया अर्थ-दण्ड गैर कानूनी एवं व्यर्थ होगा।

(iii) यदि अर्थ-दण्ड की राशि 10,000 तक हो तो आय-कर अधिकारी द्वारा अर्थ-दण्ड लगाया जा सकता है।

(iv) यदि अर्थ-दण्ड की राशि 20,000 ₹ तक हो तो सहायक आयुक्त या उपायुक्त द्वारा अर्थ-दण्ड लगाया जा सकता है।

() यदि आय-कर अधिकारी 10,000 ₹ से अधिक और सहायक कमिश्नर या उप-कमिश्नर 20,000 ₹ से अधिक अर्थ-दण्ड लगाता है तो उसे संयुक्त कमिश्नर अथवा कमिश्नर की पूर्व अनुमति लेनी होगी।

(vi) प्रत्येक आय-कर प्राधिकारी को अर्थ-दण्ड के आदेश की प्रतिलिपि कर-निर्धारण अधिकारी को भेजनी होगी जब तक कि वह प्राधिकारी स्वयं कर-निर्धारण अधिकारी न हो।

5. एक से अधिक धारा के अन्तर्गत दोषी होने पर प्रत्येक के लिए अलग-अलग अर्थ-दण्ड लगेगा-यदि कोई व्यक्ति कसे अधिक धाराओं के अन्तर्गत दोषी है तो उस पर एक साथ विभिन्न धाराओं के अन्तर्गत अर्थ-दण्ड लगाया जा सकता है अर्थात् । प्रत्येक चूक के लिए अलग-अलग अर्थ-दण्ड लगेगा।

Income Tax Penalties Offences

अर्थदण्ड लगाने की समय सीमा (धारा 275)

(Bar of Limitation for Imposing Penalty)

आय-कर अधिनियम के अन्तर्गत अर्थ-दण्ड लगाने की समय सीमा निम्न प्रकार निश्चित की गई है, इसके बाद अर्थ-दण्ड। नहीं लगाया जा सकता है1. यदि किसी आदेश के विरुद्ध आयक्त (अपील) या अपीलेट टिब्यनल अर्थात प्रथम अपीलीय प्राधिकारी को अपील की।

हता अर्थ-दण्ड लगाने का आदेश उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पूर्व दे देना चाहिए, जिस वित्तीय वर्ष में अय-दण्ड लगाने की कार्यवाही शुरू की गई हो अथवा उस माह के बाद छ: माह के अन्दर दे देना चाहिए, जिस माह में आयुक्त (अपील) या अपीलेट ट्रिब्यूनल का आदेश मुख्य कमिश्नर अथवा कमिश्नर को प्राप्त हुआ था, दोनों में से जो भी अवधि बाद में समाप्त हो। विशष-यदि आयुक्त (अपील) ने 1 जून, 2003 को या बाद में अपील के निस्तारण का आदेश पारित किया है, तो अर्थ-दण्ड लगाने का आदेश निम्नांकित अवधि में पारित किया जा सकता हैउस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पूर्व जिसमें अर्थ-दण्ड लगाने की कार्यवाही पूरी हुई है, अथवा उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद 1 वर्ष के अन्दर जिसमें आयक्त (अपील) का आदेश मुख्य आयुक्त/आयुक्त को प्राप्त हुआ है (दोनों में से जो भी अवधि बाद में समाप्त हो)

2. यदि किसी करनिर्धारण आदेश या अन्य आदेश के विरुद्ध मुख्य आयुक्त अथवा आयुक्त के यहाँ धारा 263 या 264 के अन्तर्गत पुनर्विचार (Revision) प्रस्तुत किया गया है, तो अर्थ-दण्ड लगाने का आदेश उस माह के अन्त से 6 माह के अन्दर पारित किया जा सकता है जिस माह में ऐसे ‘पुनर्विचार याचिका पर आदेश पारित किया गया है।

3. अन्य किसी दशा में, जिस वित्तीय वर्ष में अर्थदण्ड गाने की कार्यवाही शुरू की गयी हो उस वित्तीय वर्ष के अन्त तक या अर्थ-दण्ड लगाने की कार्यवाही जिस माह शुरू की गयी हो, उसके 6 माह के अन्दर, जो अवधि बाद में समाप्त होती हो।

कुछ अवधि समयसीमा की गणना में सम्मिलित नहीं की जाती (Certain Period not to be Included in Computing the Limitation Period) (धारा 275 का स्पष्टीकरण)-अर्थ-दण्ड लगाने की समय-सीमा (अर्थात 6 माह अथवा 1 वर्ष की समय-सीमा) की गणना में निम्नांकित अवधि को सम्मिलित नहीं किया जायेगा

(i) करदाता को धारा 129 के अन्तर्गत सुनवाई का अवसर प्रदान करने के लिए प्रयुक्त अवधिः

(ii) वह अवधि जिसके लिए निपटारा कमीशन ने धारा 245H के अन्तर्गत अर्थ-दण्ड अथवा अभियोजन से मुक्ति प्रदान की

(iii) वह अवधि जिसके लिए किसी न्यायालय के आदेशानुसार धारा 270 से 273 के अन्तर्गत अर्थ-दण्ड लगाने की कार्यवाही को रोक दिया है।

Income Tax Penalties Offences

अर्थदण्ड को कम करना अथवा माफ करना (धारा 273A)

(Reducing or Waiving Penalty)

आय-कर आयुक्त को अधिकार है कि वह स्वयं अथवा करदाता की प्रार्थना पर धारा 271(1)(c) में लगाए गए कर को कम कर सकता है अथवा अर्थ-दण्ड की राशि को पूर्णतया माफ कर सकता है। निम्नलिखित बातों से सन्तुष्ट होने पर ही वह अपने इस अधिकार का प्रयोग करेगा

1 यदि करदाता ने अपनी अघोषित आय का विवरण सद्भावनापूर्वक कर-निर्धारण अधिकारी के संज्ञान में आने से पर्व प्रस्तुत कर दिया है,

2. यदि करदाता ने जाँच के दौरान अपेक्षित सहयोग प्रदान किया है, तथा।

3. यदि करदाता ने अधिनियम के अन्तर्गत देय कर एवं ब्याज का भुगतान कर दिया है या भुगतान करने की उचित व्यवस्था कर दी है।

नोट छिपाई गई आय 5,00,000₹ से अधिक होने पर एवं अर्थ-दण्ड की राशि 1,00,000 से अधिक होने पर आयुक्त को अर्थ-दण्ड में कमी करने अथवा माफ करने से पूर्व मुख्य आयुक्त अथवा निदेशक की अनुमति लेनी होगी।

Rai Vs. C.B.D.T. AIR 1998 SC 1891. के मामले में दिये गये निर्णय के अनमार यदि करदाता ने विधिक प्रावधानों का पालन कर दिया है तो आयुक्त का यह कर्तव्य है कि वह अपनी इस शक्ति का उपयोग करदाता के पक्ष में। करें क्योंकि इस शक्ति के साथ न्याय करने का कर्त्तव्य भी निहित है।

अर्थदण्ड का लगाया जाना (धारा 273B)

(Penalty can not be Imposed)

यदि करदाता यह सिद्ध कर देता है कि निम्नांकित धाराओं के अन्तर्गत हई त्रुटि के पर्याप्त कारण थे और कर निधारण अधिकारी इस तथ्य से सन्तुष्ट है तो अर्थदण्ड नहीं लगायेगा

27110(b), 271A,271B, 271BA. 271C. 271CA, 271D, 2718, 271F, 271FA, 271FB, 272A, 272AA,272B,272BB1

Income Tax Penalties Offences

अर्थदण्ड की मदें

(Items of Penalties)

आय-कर अधिनियम के अन्तर्गत निम्नांकित भूलों के लिए करदाता पर अर्थ-दण्ड अथवा जुर्माना लगाया जा सकता है

1 कर का भुगतान करने में त्रुटि होने पर (Default in Making Payment of Tax) [धारा 221(1)]-यदि करदाता। (स्वयं कर-निरिण पर या मांग का नोटिस मिलने पर) नियत अवधि में कर का भगतान नहीं करता है तो कर-निर्धारण अधिकारी जितनी राशि उचित समझे, अर्थ-दण्ड लगा सकता है, परन्तु ऐसी राशि बकाया कर से अधिक नहीं होगी।

1A. आय की कम रिपोर्ट एवं मिथ्या (गलत) रिपोर्ट करने पर अर्थदण्ड (Penalty for Under-reporting and | Misreporting of Income) (w.e.f. A.Y. 2017-18) [धारा 270A]-कर-निर्धारण अधिकारी, कमिश्नर (अपील), प्रधान कमिश्नर या कमिश्नर आय की कम रिपोर्ट करने और मिथ्या रिपोर्ट करने पर अर्थदण्ड लगा सकते हैं।

अर्थदण्ड की दरकम रिपोर्ट की गई आय पर देय कर की राशि का 50% एवं मिथ्या रिपोर्ट करने पर देय कर की राशि का 200% अर्थदण्ड लगेगा।

2. नोटिस के अनुपालन में त्रुटि होने पर (Failure to Comply with a Notice) [धारा 271(1)(b)]-यदि करदाता धारा 142(1) खाते व प्रपत्र प्रस्तुत करने में या 143(2) साक्ष्य प्रस्तुत करने में जारी नोटिस के पालन में त्रुटि करता है अथवा धारा 142(2A) के अन्तर्गत खातों का अंकेक्षण कराने में जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने में त्रुटि करता है तो उस पर प्रत्येक त्रुटि के लिए कर-निर्धारण अधिकारी या कमिश्नर (अपील) या कमिश्नर द्वारा 10,000 ₹ का अर्थदण्ड लगाया जा सकता है।

3. आय को छिपाने पर (For Concealment of Income) [धारा 2711)(C)]-यदि कोई व्यक्ति अपनी आय के विवरण को छिपाता है अथवा आय का गलत विवरण देता है, तो उसने आय को छिपाकर जितना कर बचाने का प्रयल किया हो, कम-से-कम उतनी राशि के बराबर तथा अधिक से अधिक उसके 300 प्रतिशत धन राशि के बराबर अर्थ-दण्ड लगाया जा सकता

4. रजिस्टर्ड फर्म के लाभ के गलत वितरण करने पर (For Wrong Distribution of Profits by Registered | Firms) [धारा 271(4)]-यदि किसी भी रजिस्टर्ड फर्म के लाभों का वितरण इस प्रकार किया गया है जिससे किसी भी साझेदार की आय का हिस्सा वास्तविक राशि से कम दर्शाया गया है और यदि उस साझेदार ने अपनी आय के विवरण में वास्तविक राशि से कम राशि दर्शाई है, तो उसकी आय के विवरण को सही मान लेने पर कर की जितनी राशि बचाई जा सकती थी उसकी 150 ‘प्रतिशत राशि अर्थ-दण्ड के रूप में लगायी जा सकती है।

5. लेखापुस्तकें. तथा अन्य कागजात नहीं रखने अथवा उनकी सुरक्षा नहीं करने पर (For Failure to keep, maintain or retain Books of Account, Documents, etc.) [धारा 271(A)] -यदि कोई व्यक्ति, जिसे धारा 44AA के अन्तर्गत लेखा-पुस्तकें तथा कागजात रखना अनिवार्य है, बिना उचित कारण के लेखा-पुस्तकें आदि नहीं रखता अथवा उन्हें उतनी । अवधि तक सुरक्षित नहीं रखता जितनी अवधि तक इस धारा के अन्तर्गत रखना अनिवार्य है तो कर-निर्धारण अधिकारी या कमिश्नर (अपील) उस पर 25,000 ₹ अर्थ-दण्ड लगा सकता है।

6. तलाशी प्रारम्भ करने के पश्चात् दण्ड (Penalty where Search has been Initiated) [धारा 27 1 AAA ] -धारा 132 के अन्तर्गत 01.06.2007 को अथवा उसके पश्चात् परन्तु 01.07.2012 से पूर्व तलाशी ली जाती है तो कर-निर्धारण अधिकारी ऐसा निर्देश दे सकता है कि किसी भी विशिष्ट गत वर्ष की छिपाई गई/अघोषित आय पर देय कर के अतिरिक्त करदाता। को दस प्रतिशत अर्थ-दण्ड देना पड़ेगा।

तलाशी के दौरान यदि करदाता धारा 132(4) के अन्तर्गत छिपाई गई आय को स्वीकार करता है तथा यह दर्शाता है कि वह । आय किस प्रकार से प्राप्त की गई थी तथा उस आय पर ब्याज सहित कर का भुगतान कर देता है तो उस पर अर्थ-दण्ड नहीं। लगाया जायेगा।

इस  धारा में अर्थ दण्ड लगाये जाने पर धारा 271(1)(C) के अन्तर्गत उपरोक्त वर्णित छिपाई गई आय के सम्बन्ध में करदाता अर्थदण्ड नहीं लगाया जाएगा। इस धारा के अन्तर्गत अर्थदण्ड लगाने के सम्बन्ध में धारा 274 एवं 275 के प्रावधान भी लागू होंगे।

6A. 01.07.2012 को अथवा इसके पश्चात तलाशी लिए जाने पर दण्ड (Penalty where Search has been muated on or after 01.07.2012) धारा 271AABfw.e.f.01.07.2012-यदि 01.07.2012 का अपवास, पश्चात् तलाशी ली जाती है तो धारा 271AAB के अन्तर्गत कर-निर्धारण अधिकारी, करदाता को विनिर्दिष्ट गतवर्ष की /छपाइ गइ आय (Undisclosed Income) पर देय कर के अतिरिक्त निम्नलिखित अर्थदण्ड चुकाने का आदेश दे सकता।

() अघोषित/छिपाई गई आय का 10% अर्थदण्ड-विनिर्दिष्ट गत वर्ष की अघोषित आय पर 10% अर्थदण्ड देना होगा यदि

(1) तलाशी के दौरान यदि करदाता धारा 13264) के अन्तर्गत अघोषित/छिपाई गई आय को स्वीकार करता है और यह भी बताता है कि उक्त आय किस प्रकार प्राप्त हुई है।

(ii) सम्बन्धित अघोषित आय को प्राप्त करने का प्रमाण/सबूत देता है।

(iii) छिपाई गई आय के सम्बन्ध में निर्धारित तिथि को या उससे पूर्व ब्याज सहित कर का भुगतान कर देता है तथा उक्त आय को घोषित करते हुए आय-विवरणी (Return of Income) दाखिल कर दता हा..

() अघोषित/छिपाई गई आय का 20% अर्थदण्ड-यदि करदाता अघोषित आय को तो स्वीकार नहीं करता है, परन्तु छिपाई गई आय के सम्बन्ध में निर्धारित तिथि को या उससे पूर्व ब्याज सहित कर का भुगतान कर देता है तथा उक्त आय को घाषित करते हुए आय-विवरणी (Return of Income) भी दाखिल कर देता है अर्थात् यदि करदाता, उपरोक्त (अ) में वर्णित (1) एवं (ii) वाली शर्त पूरी नहीं करता है, परन्तु (iii) शर्त पूरी करता है तो विनिर्दिष्ट गतवर्ष की अघोषित आय पर 20% अर्थदण्ड देना। होगा।

() अघोषित आय का 30% अर्थदण्ड-यदि करदाता उपरोक्त (अ) में वर्णित (i), (ii) एवं (iii) तीनों ही शर्ते पूरी नहीं। करता है तो छिपाई गई आय का कम-से-कम 30% एवं अधिकतम 90% के बराबर अर्थदण्ड लगाया जाएगा।

Income Tax Penalties Offences

7. लेखों का अंकेक्षण कराने पर (For Failure to get Accounts Audited) [धारा 271B] -यदि कोई व्यक्ति बिना उचित कारण के किसी भी गत वर्ष में सम्बन्धित लेखों का अंकेक्षण नहीं कराता अथवा धारा 139(1) अथवा 142(1)(i) के अन्तर्गत अपनी आय के विवरण के साथ अंकेक्षण रिपोर्ट पेश नहीं करता तो कर-निर्धारण अधिकारी उसकी कुल बिक्री के अथवा पेशे की कल प्राप्तियों के आधे प्रतिशत के बराबर तथा अधिकतम 1.50.000 (w.e.f.A.Y. 2011-12) र जुर्माना कर सकता है।

8. स्रोत पर कर की कटौती करने में त्रुटि होने पर (Failure to Deduct Tax at Source) (धारा 271 C)-यदि कोई करदाता धारा 192 से 195 तक स्रोत पर पूर्ण या आंशिक रूप से कर कटौती करने में त्रुटि अथवा धारा 1150 के अन्तर्गत लॉटरी एवं लाभांश पर देय कर का भुगतान करने में त्रुटि करता है तो उस पर स्रोत पर कर कटौती न की गयी या भुगतान न की गया राशि के बराबर अर्थ-दण्ड लगाया जा सकता है।

9. स्रोत पर करसंग्रह में त्रुटि (Failure to Collect Tax at Source) (धारा 271CA) -यदि कोई करदाता स्त्रोत पर कर संग्रह करने में त्रुटि करता है तो उस पर स्रोत पर संग्रह न किये गये राशि के बराबर अर्थ-दण्ड लगाया जायेगा।

10. ऋणों की स्वीकति से सम्बन्धित धारा 269SS के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर जुर्माना (Penalty for Failure to Comply with the Provisions of Section 269SS Regarding Accepting of Loans etc.) (धारा 271D)-यदि कोई व्यक्ति बीस हजार से अधिक राशि ऋण या जमा के रूप में रेखांकित चैक अथवा ड्राफ्ट के अतिरिक्त प्राप्त करता है तो उस पर प्राप्त ऋण अथवा जमा की राशि के बराबर जुर्माना किया जा सकता है।

11. धारा 269T के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर जुर्माना (Penalty for Failure to Comply with the Provisions of Section 269T) (धारा 271E)-यदि किसी करदाता द्वारा धारा 269T के प्रावधानों के विपरीत 20,000 ₹ या इससे अधिक की राशि का (जमा या ऋण का) पुनर्भुगतान रेखांकित चैक या ड्राफ्ट द्वारा न करके नगद राशि में भुगतान किया जाता है तो उस पर भुगतान की गई राशि के बराबर जुर्माना किया जा सकता है।

धारा 271C,271D तथा 271E के अन्तर्गत दण्ड केवल आय-कर के संयुक्त कमिश्नर के द्वारा ही लगाए जाएंगे।

12. आय का विवरण पेश न करने पर अर्थ-दण्ड (Penalty for Non-filing of Return) (धारा 271F)-यदि कोई। व्यक्ति धारा 139(1) के अन्तर्गत कर-निधारण वर्ष का समाप्ति से पूर्व उस कर-निर्धारण वर्ष का अपनी आय का विवरण दाखिल नहीं करता है तो उस पर 5,000 ₹ अर्थ-दण्ड लगाया जा सकता है। कर-निर्धारण वर्ष 2018-19 से इस धारा के अन्तर्गत अर्थदण्ड नहीं लगाया जाएगा।

13. वार्षिक सूचना विवरण देने में त्रुटि (Failure to Furnish Annual Information Return) (धारा। 271FA)–यदि करदाता धारा 285BA(I) के अन्तर्गत वार्षिक सूचना विवरण (Annual Information Return) तैयार करने एवं दाखिल करने में कोई त्रुटि करता है तो उस पर त्रुटि की अवधि के लिए 100 ₹ प्रतिदिन का अर्थ-दण्ड लगाया जा सकता है। यहाँ टि अवधि से आशय त्रुटि संशोधित करके ठीक कर दिये जाने की तिथि तक से

यदि कोई व्यक्ति धारा 285BA(5) में वार्षिक सूचना विवरण दाखिल करने का नोटिस मिलने पर भी इसे दाखिल नहीं करता. तो नोटिस में ऐसा विवरण दाखिल करने की अवधि समाप्त होने के अगले दिन से उस पर 500 ₹ प्रतिदिन का अर्थदण्ड । उस समय तक लगाया जाएगा, जब तक चूक चालू रहेगी। (w.e.f. A.Y. 2014-15)

14. यदि कोई व्यक्ति धारा 285BA के अन्तर्गत दिए गए विवरण में गलत सूचना देता है तो उस पर 50,000 र का अर्थदण्ड लगाया जाएगा।

15. उद्गम स्थान पर कर की कटौती या कर संग्रह का विवरण दाखिल करने में चूक [धारा 271H] (01.07.2012 से। प्रभावा)-याद कर का कटौती करने वाला या कर संग्रहकर्ता (अ) कर की कटौती अथवा कर संग्रह का विवरण धारा 200(3) पापारा 206C(3) म निधारित अवधि में दाखिल नहीं करता या (ब) गलत सचना प्रस्तत करता है, तो उस पर कम-स-कम 10,000र एव आधकतम 1,00,000र अर्थदण्ड लगाया जा सकता है। परन्त यहाँ पर (अ) में वर्णित दशा म अथदण्ड नहा। लगाया जायेगा बशर्ते-i) उसने कर कटौती या कर संग्रह की राशि के साथ धारा 234E में वर्णित फीस एवं ब्याज का भुगतान। कर दिया ह; (ii) विवरण प्रस्तुत करने की निर्धारित तिथि से एक वर्ष समाप्त होने से पूर्व ही विवरण दाखिल कर दिया है।।

16. प्रश्नों के उत्तर नहीं देने, बयान पर हस्ताक्षर नहीं करने, जानकारी पेश नहीं करने, आय का विवरण पेश नहीं करने। तथा जाच की सुविधा नहीं देने पर दण्ड (Penalty for Failure to Answer Questions, Sign Statement. Furnish | Information, Returns or Statements. Allow Inspections etc.) [धारा 2724(1)]-याद काईमा करदाता निम्नालाखत में से किसी भी अपराध का दोषी पाया जाए तो उस पर दस हजार रुपए जुर्माना किया जा सकता है

() यदि कोई भी व्यक्ति तो अपने कर-निर्धारण के सम्बन्ध में कानूनन बयान देने के लिए उत्तरदायी है, किसी भी आय-कर पदाधिकारी के द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर नहीं देता; अथवा

() यदि कोई भी व्यक्ति जो किसी भी विवरण पर हस्ताक्षर करने के लिए उत्तरदायी है, उस पर हस्ताक्षर करने से मना करता है; अथवा

() यदि किसी भी व्यक्ति को किसी विशेष स्थान तथा समय पर लेखा-पुस्तकों को पेश करने अथवा अन्य कोई साक्ष्य पेश करने अथवा गवाही देने के लिए स्वयं उपस्थित होने के सम्बन्ध में सम्मन भेजे गए हों वह उसका पालन नहीं करता; अथवा

() यदि कोई भी व्यक्ति स्थायी खाता नम्बर के सम्बन्ध में धारा 139A के प्रावधानों का उल्लंघन करता है।

17. धारा 133B के अन्तर्गत माँगी गई कतिपय सूचनाओं को देने में चूक करना [धारा 272AA] यदि कोई व्यक्ति ‘धारा 133B के अन्तर्गत मांगी गयी कतिपय सूचनाओं को देने में चूक करता है तो संयुक्त-आयुक्त, संयुक्त-निदेशक अथवा कर-निर्धारण अधिकारी द्वारा उस व्यक्ति पर 1,000 ₹ तक का अर्थ-दण्ड लगाया जा सकता है। इस धारा के अन्तर्गत अर्थ-दण्ड लगाने सम्बन्धी आदेश देने से पूर्व करदाता को सुनवाई का अवसर दिया जाना आवश्यक है।

18. स्थायी खाता संख्या के आवेदन में त्रुटि करना या इसके उद्धृत करने में त्रुटि करना (Failure to Apply for or Quote PAN) [धारा 272(B)(1)]-यदि करदाता धारा 139A के अन्तर्गत स्थायी खाता संख्या के आवेदन में त्रुटि करता है या इसके प्रकटीकरण में त्रुटि करता है तो उसे 10,000 ₹ का अर्थ-दण्ड देना होगा।

19. खाता संख्या लिखने में असफलता (Failure to Quote PAN) [धारा 272B(2)]-आय-कर अधिनियम की निम्नलिखित धाराओं के अन्तर्गत स्थायी खाता संख्या लिखने में त्रुटि करने पर अर्थ-दण्ड की स्थिर रकम 10,000₹ होगी

(i) धारा 139A(5)(C) के अन्तर्गत किसी भी प्रपत्र पर स्थायी खाता संख्या उद्धृत (Quote) करने में असफलता, या

(ii) धारा 139A(5A) के द्वारा माँगी गयी स्थायी खाता संख्या को सूचित करने में असफलता, या

(iii) गलत स्थायी खाता संख्या अथवा इस गलत संख्या की उसे जानकारी है, इसकी सूचना देना या उद्धृत करना।

20. धारा 203A के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर अर्थ-दण्ड (Penalty for Failure to Comply with Provisions of Section 203A) (धारा 272BB) यदि कोई व्यक्ति धारा 203A के प्रावधानों का उल्लंघन करता है जैसे उद्गम स्थान पर कर की कटौती तथा खाता नम्बर का आवेदन करने, तो कर-निर्धारण अधिकारी द्वारा दस हजार १ का अर्थ-दण्ड लगाया जा सकता है परन्तु अर्थ-दण्ड लगाने से पूर्व करदाता को सुनवाई का उचित अवसर देना आवश्यक है।

21. कर की कटौती करने अथवा जमा करने का नम्बर नहीं दर्शाने पर (Failure to Quote Tax Deduction or .Collection Number) (धारा 272BB1A) किसी भी व्यक्ति पर ‘कर की कटौती का एकाउन्ट नम्बर’ अथवा ‘टेक्स कलेक्शन एकाउन्ट नम्बर, सभी चालान, सर्टिफिकेट, स्टेटमेन्ट या अन्य कागजातों में दर्शाने का दायित्व है, जानबूझकर गलत नम्बर दर्शाता है तो कर-निर्धारण अधिकारी उस पर दस हजार ₹ का जुर्माना लगा सकता है।

जुर्म एवं सजाएँ

(Offences and Prosecutions)

अर्थ-दण्ड के अतिरिक्त आय-कर अधिनियम में कुछ सजाओं की भी व्यवस्था है। आय-कर अधिनियम में जुर्म को अपराध भी कहा जाता है तथा सजाओं को अभियोजन के नाम से भी जाना जाता है। अधिनियम की धारा 275A से धारा 280 में इन जुर्म नं राजाओं का उल्लेख किया गया है। ‘अभियोजन’ या ‘सजाओं’ (Prosecutions) के अन्तर्गत आय-कर अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन के लिए कठोर (सश्रम कारावास (Regorous Imprisonment) तथा अर्थ-दण्ड (fine) दाना का हा। प्रावधान किया गया है। यहाँ पर यह भी उल्लेखनीय है कि अभियोजन के परिणामस्वरुप जुर्माना तथा कठोर (सश्रम) कारावास। का दण्ड केवल न्यायालय द्वारा ही दिया जा सकता है। अत: यदि कोई करदाता अपराध (जुर्म) करता है तो आय-कर विभाग द्वारा ऐसे करदाता के विरुद्ध अभियोजन की कार्यवाही प्रारम्भ की जा सकती है। सम्बन्धित अधिकारियों को मामले को न्यायालय में। ले जाकर यह सिद्ध करना होगा कि करदाता ने जुर्म किया है। इसके लिए आवश्यक प्रमाण, गवाहियाँ आदि प्रस्तुत करनी होगी।। अपराध सिद्ध हो जाने पर ही ऐसे करदाता को सजा मिलेगी।

Income Tax Penalties Offences

परीक्षा हेतु सम्भावित महत्त्वपूर्ण प्रश्न

(EXPECTED IMPORTANT QUESTIONS FOR EXAMINATION)

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

(Long Answer Questions)

1 अर्थ-दण्ड से आप क्या समझते हैं ? अर्थ-दण्ड के सम्बन्ध में आय-कर अधिनियम के प्रावधानों का वर्णन कीजिए।

What do you understand by Penalties ? Discuss the provisions of Income tax Act regarding penalties.

2. अर्थ-दण्ड लगाने के सामान्य सिद्धान्त बताइए। किन परिस्थितियों में आय-कर कमिश्नर अर्थ-दण्ड कम अथवा माफ कर सकता है ? समझाइए।

(Explain the general principles of imposing penalty. Under what circumstances can the Commissioner of Income Tax reduce or waive penalties ? Explain.)

3. धारा के अन्तर्गत किन-किन चूकों के लिए अर्थ-दण्ड से मुक्ति दी जा सकती है ? समझाइए।

For which failures penalty may not be imposed u/s 273B ? Explain.

4. अभियोजन से आप क्या समझते हैं ? अभियोजन के सम्बन्ध में आय-कर अधिनियम के प्रावधानों का वर्णन कीजिए।

What do you understand by Prosecutions ? Discuss the provisions of Income tax Act regarding Prosecutions

5. निम्नांकित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए

(Write short notes on the following) :

(6) आय का विवरण दाखिल करने में त्रुटि (Failure to furnish return of Income.)

(i) बही-खाते तथा प्रपत्र प्रस्तुत करने में त्रुटि (Failure to Produce accounts and documents.)||

(ii) लेखा-परीक्षण कराने में त्रुटि (Failure to get accounts audited.)/

(iv) अर्थ-दण्ड लगाने की समय सीमा (Time-limit of Penalties.)

Income Tax Penalties Offences

लघु उत्तरीय प्रश्न

(Short Answer Questions)

1 अर्थ-दण्ड माफ करने सम्बन्धी आयुक्त के अधिकार का वर्णन कीजिए।

Describe the right of Commissioner relating to exemption from penalty.

2. उन दो अपराधों को बताइये जिनके लिए किसी व्यक्ति के विरुद्ध अभियोजन की कार्यवाही की जा सकती है।

State those two offences which make a person liable for prosecution.

क्या लगाया गया अर्थ-दण्ड कम किया जा सकता है ? इसके सम्बन्ध में संक्षेप में प्रावधान बताइए।

Whether the penalty imposed can be reduced ? Describe in brief the provisions relating to this.

4. कम्पनी, फर्म तथा हिन्दू अविभाजित परिवार द्वारा जुर्म करने पर आय-कर अधिनियम के अन्तर्गत कौन जिम्मेदार होगा तथा किसे सजा दी जायेगी?

(Under the Income Tax Act who should be held liable and punished for offences committed by companies, firms and Hindu undivided families ?)

5. अर्थदण्ड लगाने के सामान्य सिद्धान्त बताइये।

Explain the general principles of imposing penalty.

Income Tax Penalties Offences

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

(Very Short Answer Questions)

1 अर्थ-दण्ड का अर्थ बताइये

(Give the meaning of Penalty.)

2. छिपाई गई आय के सम्बन्ध में अर्थ-दण्ड बताइये।

State the penalty for concealment of income.

3. अर्थ-दण्ड लगाने की समय-सीमा क्या है (What is the time limit for imposing penalty.)

4. उद्गम स्थान पर कर काटने में त्रुटि करने पर कितना आर्थिक दण्ड हो सकता है?

How much penalty can be imposed for failure to deduct tax at source ?

5. उद्गम स्थान पर काटे हुए कर को जमा कराने में चूक करने पर न्यूनतम कितनी सजा हो सकती है ?

What is the minimum punishment for the failure to deposit tax deducted at source ?

6. जान-बूझकर खातों तथा प्रपत्रों को प्रस्तुत करने में त्रुटि करने पर न्यूनतम कितना जुर्माना हो सकता है?

How much minimum fine can be charged for wilful failure to produce books of accounts or documents

Income Tax Penalties Offences

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